कोई हत्यारा साहित्यकार हो सकता है अगर नही तो यह कर दिखाया है केन्द्रीय जेल रीवा में अपनी पत्नी की हत्या के अपराध मे सजा काट रहे नागेन्द्र सिंह परिहार ने। नागेन्द्र ने कई उपन्यास, नाटक, कहानियॉ और 5 सौ से भी अधिक कविताओं की रचना की है। 34 वर्षीय नागेन्द्र सिंह परिहार को देखकर नही लगता कि ये अपराधी होगा लेकिन ये सच है न्यायालय ने पत्नि का हत्यारा करार किया है और केन्द्रीय जेल रीवा में सजा काट रहा है। सिविल इंजीनियर, एम.ए., एम.फिल और हिन्दी साहित्य से पी.एच.डी कर रहे नागेन्द्र को क्या मालूम की नियति की मार उसे जेल की चार दिवारी तक ले आयेगी। नागेन्द्र ने जेल मे रहकर कई ड्रिग्री और डिप्लोमा हासिल किये है। नागेन्द्र की रचनाओं में.. पश्चाताप, नियति, हत भागिता प्रमुख उपन्यास है। शनिवार, 15 अगस्त 2009
कैदी बना साहित्यकार
कोई हत्यारा साहित्यकार हो सकता है अगर नही तो यह कर दिखाया है केन्द्रीय जेल रीवा में अपनी पत्नी की हत्या के अपराध मे सजा काट रहे नागेन्द्र सिंह परिहार ने। नागेन्द्र ने कई उपन्यास, नाटक, कहानियॉ और 5 सौ से भी अधिक कविताओं की रचना की है। 34 वर्षीय नागेन्द्र सिंह परिहार को देखकर नही लगता कि ये अपराधी होगा लेकिन ये सच है न्यायालय ने पत्नि का हत्यारा करार किया है और केन्द्रीय जेल रीवा में सजा काट रहा है। सिविल इंजीनियर, एम.ए., एम.फिल और हिन्दी साहित्य से पी.एच.डी कर रहे नागेन्द्र को क्या मालूम की नियति की मार उसे जेल की चार दिवारी तक ले आयेगी। नागेन्द्र ने जेल मे रहकर कई ड्रिग्री और डिप्लोमा हासिल किये है। नागेन्द्र की रचनाओं में.. पश्चाताप, नियति, हत भागिता प्रमुख उपन्यास है। सांकेतिक राष्ट्रगान
राष्ट्रगान सुनने से हर हिन्दुस्तान मे जोश और जज्बा दिखने लगाता है... देशप्रेम की भावना से प्रेरित रीवा के मूंकबधिर छात्रों नें सांकेतिक राष्ट्रगान को इजात किया है। सांकेतिक शैली से सैकडों मूकबधिर राष्ट्रगान कर देश को सलाम करते है। हिन्दुस्तान की मिट्टी मे इतना जोश और जुनून है कि देश के लिये कुछ भी कर गुजरने की प्रेरणा हर एक देश प्रेमी के दिलो दिमाग मे होती है। इसे जज्बे से लबोरेज इन मूक बधिरों छात्रों ने सांकेतिक शैली से राष्ट्रगान करना सीखा लिया है। हॉथ की उगलियॉ के इसारे से सांकेत कर ये वहीं राष्ट्रगान प्रस्तुति दे रहे है, जो आम इंसान गाकर सुनता है। अब ये अपने आप को किसी से कमजोर नही समझ रहते है। यह करना बेहद कठिन था लेकिन इनकी लगन और प्रवल इच्छा ने यह कर दिखाया। अब ये राष्ट्रगान करने मे पूरी तरह से परगत हासिल कर चुके है। पहले ही अपने आप को समाज की मुख्य धारा से अलग होना महसूस करते थे लेकिन अब ये संकेत के माध्यम से अपनी देश प्रेम की भावना को जन-जन तक पहुचा सकते है। कौन कहता है आसमान मे सुराग हो नही सकता...एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों। सांकेतिक रुप से राष्ट्रगान कर इन बेजुबानों ने वतन के प्रति अपनी प्रेम दर्शा दिया है। इनसे वतन परस्त देश वासियों को सीख लेनी चाहिये। नदी में कॉतिकारी ध्वाजारोहण
देश के क्रॉतिकारी भले आज हमारे बीच ना हो, लेकिन इनकी परंपरा आज भी जीवित है। देश में जज्बा जगाने के लिये कॉतिकारी जिस तरह से अंग्रजों से बगावत करके ध्वजारोहण किया करते थे। ठीक उसी तरह अब भी रीवा में कुछ देशभक्त नदी के बीच जाकर नाव में ध्वजारोहण करते है और मुश्किल से मिली आजादी के महत्व को बताते है। यै मेरे वतन के लोगों जरा ऑख में भर लो पानी.. जो शहीद हुये है उनकी जरा यदा करो कुर्वानी... देश की आजादी का सपना सजोये कॉतिकारी भले ही अब आजाद भारत देखने के लिये ना हो, लेकिन उनकी कुर्बानी आज भी याद की जाती है। जी हॉ रीवा मे शहीदों की इसी कुर्वानी को तरोतजा करने के लिये बीहर बिछिया नदी के राजघाट तट पर क्रॉतिकारी ठंग से ध्वाजरोहण किया जाता है। यह अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही वर्षो पुरानी परंपरा है और इसे आज भी कायम रखा गया है। नदी मे ध्वाजारोहण करने से युवाओ मे उत्साह और देश के लिये कॉति करने का जज्बा बनता है। इनकी रोम-रोम में भारत माता के लिये त्याग और बलिदान की भावना समा जाती है। यही वजह है कि हर हिन्दुस्तानी चाहता है कि देश के झंडा की आन बान सदैव बनी रहे। ध्वाजारोहण करने के साथ ही ये देशभक्त आजादी के महत्व को लोगो तक पहुंचाते है और देश की मिट्टी का कर्ज अदा करने की सीख देते है। इससे देश के लिये मर मिटने का आगाज हो रहा है वहीं क्रॉतिकारियों की कुर्वानी तरोतजा हो रही है।माता मंदिर
यूं तो जगह-जगह मंदिर-मश्जिद बने मिल जायेगें, लेकिन देशभक्ति से प्रेरित होकर कोई मंदिर बनवाये और फिर भारत माता की मूर्ती स्थापित करे ऐसे देश भक्त बहुत कम होगे। जी हॉ रीवा में एक देश प्रेमी ने लाखों रुपये खर्च कर भारत माता मंदिर बनवाया है। देश-भक्ति भावना से प्रेरित देश प्रेमी संतोष पाण्डेय ने शहर के बीचों-बीच स्थित बेशकीमती जमीन में भव्य भारत माता मंदिर का निर्माण कराया। 4 लाख रुपये की लागत बने इस मंदिर मे भारत माता की सुन्दर प्रतिमा की भी विधिवत स्थापना की गयी। हर रोज देवी-देवताओं की तरह ही भारता माता की पूजा-पाठ और आरती इस मंदिर मे होती है। इसके लिये एक पुजारी भी नियुक्त किया गया है। 26 जनवरी मे ध्वजा रोहण के दौरान देशप्रेमी संतोष पाण्डेय के मन में मंदिर बनाने का ख्याल आया था और इसे संतोष ने अमली जामा पहना दिया। मन्नत और मनोकामना पूरी करने के लिये खूब लोगों ने मंदिर-मश्जिद बनवाये होगें लेकिन देश के लिये कोई अपनी गडी कमाई का एक रुपया खर्च ऐसे बहुत कह है। फिर संतोष ने तो 4 लाख रुपये का भारत माता मंदिर ही निर्माण करा दिया है। इस मंदिर से सही मार्ग मे चलने की प्ररेणा और जीने की राह मिल रही है। संतोष के इस जज्बे से बच्चों और युवाओं में भी देशभक्त की भावना का संचार हो रहा है। बहरहाल संतोष ने वर्षो की कमाई से भारत माता मंदिर का निर्माण कराकर अपने वतन की मिट्टी का कर्ज तो अदा कर दिया है। लेकिन जरुरत है हर हिन्दुस्तान को आपसी भाईचारा बना कर चलने की तभी इन सपूतों के सपने पूरे हो सके।
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