शनिवार, 15 अगस्त 2009

कैदी बना साहित्यकार

कोई हत्यारा साहित्यकार हो सकता है अगर नही तो यह कर दिखाया है केन्द्रीय जेल रीवा में अपनी पत्नी की हत्या के अपराध मे सजा काट रहे नागेन्द्र सिंह परिहार ने। नागेन्द्र ने कई उपन्यास, नाटक, कहानियॉ और 5 सौ से भी अधिक कविताओं की रचना की है। 34 वर्षीय नागेन्द्र सिंह परिहार को देखकर नही लगता कि ये अपराधी होगा लेकिन ये सच है न्यायालय ने पत्नि का हत्यारा करार किया है और केन्द्रीय जेल रीवा में सजा काट रहा है। सिविल इंजीनियर, एम.ए., एम.फिल और हिन्दी साहित्य से पी.एच.डी कर रहे नागेन्द्र को क्या मालूम की नियति की मार उसे जेल की चार दिवारी तक ले आयेगी। नागेन्द्र ने जेल मे रहकर कई ड्रिग्री और डिप्लोमा हासिल किये है। नागेन्द्र की रचनाओं में.. पश्चाताप, नियति, हत भागिता प्रमुख उपन्यास है।

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